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बच्चों को कैसे करवाएं ध्यान Vnita Kasnia Punjab 🌹🌹🙏🙏🌹🌹🐇यदि हम कम उम्र से ही ध्यान साधना करने में सक्षम हो, तो दुनिया कैसी दिखेगी? यहाँ हमें अपने बच्चों को एक नियमित ध्यान (Meditation for Kids) अभ्यास में ढालने की आवश्यकता है। बच्चा ध्यान जैसी श्रमसाध्य प्रथाओं के बजाय, ध्यान के माध्यम से वर्तमान क्षण में रहते हुए अपने समग्र विकास को प्राप्त करता है। यानी की उसका शारीरिक व मानसिक विकास। इस लेख में हम आपको आपके संतान के लिए ध्यान बताने जा रहे जिसका अभ्यास करना बेहद लाभकारी होगा।बच्चों के लिए ध्यान क्या है?एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें बच्चा ध्यान लगाता है और अपने मन व मस्तिष्क को साधने का प्रयास करता है। यह क्रिया सांस को साधने की है। बच्चों के लिए ध्यान (Meditation for Kids) उनके समग्र विकास का एक मार्ग है। जिस पर चलकर वे अपने आप को एक नये स्वरूप व व्यक्तित्व में ढालते हैं।ध्यान कैसे करेंहम चाहते हैं कि बच्चे स्वस्थ और खुश रहें, न केवल अब बल्कि उनके जीवन के लिए भी और उन्हें ध्यान के बारे में जल्दी सिखाने से उन्हें ऐसा करने में मदद मिलेगी। इसीलिए हमने यहां कुछ सरल क्रिया बताने जा रहे हैं जिसका अनुसरण कर आप अपने बच्चों से इसका पालन करवा सकते हैं।बच्चे स्वाभाविक रूप से माइंडफुलनेस का अभ्यास करते हैं - ध्यान का एक प्रमुख घटक - क्योंकि उनके पास कम मानसिक बाधाएं, पूर्वाग्रह और पूर्व-निर्धारित मान्यताएं हैं जो उन्हें ध्यान की शुद्ध स्थिति का अनुभव करने की अनुमति देती हैं।पहले चरण में आपको पार्क में किसी साफ जगह का चयन कर आप बच्चे के साथ चौकड़ी मारकर बैठ जाएं।दूसरे चरण में बच्चे को आंखे बंद करने का निर्देश दें, साथ ही बच्चे को बताए की वह रिलैक्स होकर कमर सीधी करके बैठे और किसी भी चीज के बारे में कुछ ना सोचे। साथ ही बच्चों को धीरे-धीरे लंबी सांसे लेने के लिए कहें। आप चाहें तो शुरूआत में रिलैक्सेशन म्यूजिक भी लगा सकते हैं ताकि बच्चों का इधर उधर ध्या‍न ना भटके।तीसरे चरण में अब आपको अपने बच्चे को सांस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहना है। ध्यान रहे इसके लिए बच्चा सहज हो व सांस आराम से व समान अनुपात में ले रहा हो।चौथे चरण में आपको इसकी पुनरावृत्ति करवानी है। परंतु इसके लिए आप बच्चे पर किसी भी तरह का दबाव न बनाएं। शुरूआत में हो सकता है वह कम रूचि लें, समय दें इसमें सुधार होगा। पांचवें चरण में आप अपने बच्चे के लिए इस प्रकिया का समय तय करें।ध्यान करने के लाभ हैध्यान करने के कई लाभ हैं परंतु हम यहां हम कुछ लाभ दे रहे हैं। जिनके बारे में जानकर आप इसकी अनिवार्यता को समझ करेंगे। जो इस प्रकार हैं -एकाग्रता को बढ़ाता हैसिर्फ एक या दो पीढ़ी में, चीजें इतनी बदल गई हैं कि हमारा ध्यान नहीं बढ़ सका है। सोशल मीडिया और तकनीकी उपकरणों के बीच, बच्चे - और वयस्क - लगातार इंटरनेट पर सर्फिंग कर रहे हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं और किताब पढ़ने के बजाय घर के अंदर वीडियो गेम खेल रहे हैं। जो बच्चे अपने उपकरणों के साथ बड़े होते हैं, उन्हें अक्सर ध्यान केंद्रित करना और चौकस रहना मुश्किल हो जाता है। ध्यान उन्हें सिखाता है कि एक समय में एक चीज़ पर उनका ध्यान कैसे केंद्रित करना संभव है, और यह वास्तव में यह बहुत जरूरी है कि विचलित न हो। क्योंकि उन्हें अपना समग्र विकास करना है।करुणा और आत्मसम्मान को बढ़ावा देनाअच्छी खबर यह है कि ध्यान बच्चों की सुरक्षा, सहानुभूति और आंतरिक स्थिरता की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है, और यह बदले में, करुणा, आनंद और आत्म-सम्मान का निर्माण करता है। ध्यान बच्चों को सिखाता है कि किस तरह किस महौल में बरताव करना है।आत्मविश्वास को बढ़ाता हैबच्चों के लिए ध्यान (Meditation for Kids) बच्चों को आत्म-जागरूकता हासिल करने और अधिक आत्मविश्वास बनने में मदद करता है। आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से विकसित होता है जब बच्चे अपने ध्यान अभ्यास से सीखते हैं कि उन्हें अपने सभी विचारों और भावनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं करनी है - वे चुन सकते हैं कि कौन से लोग उनके ध्यान और प्रतिक्रिया का गुण रखते हैं। अपरिचित परिस्थितियों से निपटने के लिए आत्मविश्वास से भरपूर बच्चे बेहतर होते हैं।सहानुभूति और खुशी का निर्माणध्यान बच्चों को सीखने में मदद करता है कि वे अपने प्यार को दूसरे बच्चों के साथ कैसे साझा करें। वे अधिक धैर्यवान और समझदार बनते हैं, दूसरों की अधिक तत्परता से सुनते हैं और उनके साथ सहानुभूति रखते हैं। इसके साथ ही उनका व्यक्तित्व भी निखरता है। कुछ मिलाकर ध्यान का बच्चों पर व्यापाक असर पड़ता है।

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ਯੋਗBy समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब//🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹ਇਹ ਲੇਖ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਰੀਰਕ, ਮਾਨਸਿਕ ਅਤੇ ਅਧਿਆਤਮਕ ਅਭਿਆਸਾਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਾਰੇ ਹੈ. ਹੋਰ ਉਪਯੋਗਾਂ ਲਈ, ਯੋਗਾ

ਯੋਗ By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब// 🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹 ਇਹ ਲੇਖ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਰੀਰਕ, ਮਾਨਸਿਕ ਅਤੇ ਅਧਿਆਤਮਕ ਅਭਿਆਸਾਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਾਰੇ ਹੈ. ਹੋਰ ਉਪਯੋਗਾਂ ਲਈ,  ਯੋਗਾ  ਵੇਖੋ  . ਕਸਰਤ ਵਿੱਚ ਯੋਗਾ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਲਈ,  ਯੋਗ ਨੂੰ ਕਸਰਤ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ  ਰੇਪੀ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਯੋਗਾ ਦੇ ਵਰਤਣ ਲਈ, ਵੇਖੋ,  ਥੈਰੇਪੀ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਯੋਗਾ  . "ਯੋਗ" ਇੱਥੇ ਰੀਡਾਇਰੈਕਟ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਹੋਰ ਵਰਤੋਂ ਲਈ,  ਯੋਗ (ਡਿਸਅਬਿਗਿuationਗੇਸ਼ਨ) ਵੇਖੋ  . ਇਸ ਲੇਖ ਵਿਚ  ਇੰਡਿਕ ਟੈਕਸਟ ਹੈ  .  ਸਹੀ  ਪੇਸ਼ਕਾਰੀ ਸਹਾਇਤਾ ਤੋਂ  ਬਿਨਾਂ , ਤੁਸੀਂ ਇੰਡਿਕ ਟੈਕਸਟ ਦੀ ਬਜਾਏ  ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਚਿੰਨ੍ਹ ਜਾਂ ਬਕਸੇ  , ਗਲਤ ਥਾਂ ਤੇ ਸਵਰ ਜਾਂ ਗੁੰਮ ਸੰਜੋਗ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ . ਯੋਗਾ  (  /  ਜੰਮੂ   oʊ  ɡ  ə  /  ;  [1]   ਸੰਸਕ੍ਰਿਤ  :  योग  ;  ਉਚਾਰਨ  ) ਦੇ ਇੱਕ ਗਰੁੱਪ ਨੂੰ ਹੈ  , ਸਰੀਰਕ  ,  ਮਾਨਸਿਕ  , ਅਤੇ  ਰੂਹਾਨੀ  ਅਮਲ ਜ ਤਾੜਨਾ ਜਿਸ ਵਿਚ ਉਪਜੀ ਹੈ  ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਭਾਰਤ  . ਯੋਗ  ਹਿੰਦੂ ਧਰਮ  ਦੇ ਛੇ ...

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हलाला क्या है? क्या आप किसी ऐसी महिला को जानते हैं जो इस कुप्रथा का शिकार हुई हो?सन 1982 मे बी आर चोपड़ा की एक फिल्म आई थी जिसने मुस्लिम धर्म की कुप्रथाओं को सामने लाया था। फिल्म थी निकाह। इसमे तीन तलाक तथा हलाला जैसे मुद्दों का औरत पर क्या असर होता है ये दिखाने का प्रयास किया गया था।सभी धर्मों में कुछ ऐसी रीतियां व्याप्त हैं जिनके नकारात्मक प्रभावों के कारन उन्हें हम कुरीति कहने पर विवश हो जाते हैं। आज मैं इस्लाम धर्म में प्रचलित एक ऐसी ही कुरीति पर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहती हुँ।हलालाहलाला एक ऐसी प्रथा है जो एक लम्बे समय से इस्लाम धर्म का हिस्सा रही है और कई औरतों के अपमान की गवाह रही है। इसके अंतर्गत जब किसी मुस्लिम महिला का शौहर उसे तलाक दे देता है और पुनः उसी औरत से विवाह करना चाहता है तो वो सीधे तौर पर ऐसा नहीं कर सकता।अपनी ही तलाकशुदा बीबी से निकाह करने के लिए उस महिला को पहले किसी और मर्द से निकाह करना पड़ता है, उसके साथ कम से कम एक रात गुजारनी पड़ती है, सफ़लतापूर्वक सहवास करना पड़ता है, फिर वो दूसरा पति उसे पुनः तलाक देता है, तब जाकर वो महिला अपने पूर्व पति से फीर से निकाह कर सकती है।जाने कितनी मुस्लिम महिलाओं को इस दंश से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। और ये सब सजा उसे बिना किसी गलती के झेलनी पड़ती है।सामान्य लोगों कि बात बाद मे करुँगी। पहले एक जानकारी दे दूँ आपको। आप सब मीना कुमारी के नाम से तो परिचित होंगे ही। वही मीना कुमारी जिन्होंने पाकीजा, साहब बीबी और गुलाम तथा दिल अपना और प्रीत पराई जैसी हिट फ़िल्में दीं।मीना कुमारी का निकाह उस समय के सुविख्यात डायरेक्टर कमाल अमरोही से हुआ था। उनके रिश्ते कई उतार चढाव वाले रहे। एक बार गुस्से में आकर उन्होंने मीना कुमारी को तीन तलाक दे दिया। बाद में उन्हें काफी पछतावा हुआ तो उन्होंने माफी मांगी और फिर से मीना कुमारी से निकाह करने की बात कही। पर इसके लिए मीना कुमारी की शादी कमाल अमरोही ने उनका निकाह अपने दोस्त अमान उल्ला खां (ज़ीनत अमान के पिता) से करा दिया। मीना कुमारी को न चाहते हुए भी अमान उल्ला के साथ हमबिस्तर होना पड़ा। फिर इद्दत (मासिक धर्म) के बाद अमान उल्ला ने मीना कुमारी को तलाक दिया और तब जाकर कमाल अमरोही ने मीना कुमारी से फिर से निकाह किया। कहा जाता है कि इसका मीना कुमारी पर इतना बुरा मानसिक असर पड़ा कि वो अपनी तुलना तवायफ से करने लगीं थी।अब मैं अपने एक मित्र की रिश्तेदार की बात बताती हूँ। उस औरत का नाम था नगमा। नगमा को उसके शराब में डूबे रहने वाले पति ने सिर्फ इसलिये तलाक दे दिया क्योंकि उसने अपने धोखेबाज दोस्त की इस बात पर यकीन कर लिया कि नगमा अपने घरवालों से उसकी शिकायत करती है। बाद मे जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने अपने बच्चों की परवरिश का वास्ता देकर उसे हलाला करने को विवश किया। उसकी शादी अपने दोस्त से करा दी। बाद में उस दोस्त ने बोला कि निकाह के बाद भी उनका जिस्मानी रिश्ता नहीं बना जो कि हलाला के लिए जरूरी है। इस रिवाज की आड़ मे वो कई रातों तक नगमा का बलात्कार करता रहा। पर इससे पहले कि कोई उसकी नीयत को समझ पाता नगमा ने आत्महत्या कर ली। उसकी मौत को भी पुलिस तक पहुँचने नहीं दिया गया।मेरी नजर में हलाला एक ऐसी कुप्रथा है जो कहिं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। पर रिवाजों के नाम पर कानून भी अक्सर खामोश ही रहा है। ये एक औरत को जीते जी नर्क यातना देने जैसा है।फोटो साभार :गुगल

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